तेलियाडीह में संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की 648वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई
सिटी संवाददाता : ब्रह्मदेव प्रसाद यादव
झाझा 12 फरवरी 2025 –
झाझा प्रखंड अंतर्गत छापा पंचायत के तेलियाडीह गांव में अंबेडकर समाज कल्याण कमिटी तेलियाडीह के बैनर तले संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की जयंती बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर गांव के वरिष्ठ जन, बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता और युवा बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की रूपरेखा और संचालन
कार्यक्रम का आयोजन तेलियाडीह गांव के सामुदायिक स्थल पर किया गया, जिसमें सैकड़ों ग्रामीणों ने भाग लिया।
- अध्यक्षता – फागु रविदास
- मंच संचालन – विनोद रविदास एवं विष्णुदेव रविदास
- मुख्य अतिथि – समाज के प्रबुद्धजन और युवा नेता
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और गुरु रविदास जी की तस्वीर पर पुष्प अर्पण से की गई। इस दौरान गुरु रविदास जी के भजन और उपदेशों का पाठ किया गया, जिससे पूरे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ।
संत रविदास जी के जीवन और विचारों पर विचार-विमर्श
वक्ताओं ने संत रविदास जी के जीवन और उनके द्वारा दिए गए महान विचारों को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि गुरु रविदास जी का जीवन हमें एकता, समानता और भाईचारे का संदेश देता है। उन्होंने अपने पूरे जीवन में धार्मिक अंधविश्वासों और सामाजिक भेदभावों का विरोध किया और सच्ची भक्ति तथा मानवता की मिसाल पेश की।
संत रविदास जी का अमूल्य संदेश:
"रैदास ब्राह्मण मति पूजिए, जए होवै गुन हीन।
पूजिहिं चरन चंडाल के, जउ होवै गुन प्रवीन॥"
इसका अर्थ यह है कि अगर कोई ब्राह्मण गुणहीन है तो उसकी पूजा करने का कोई लाभ नहीं, बल्कि एक गुणवान चांडाल भी पूजनीय हो सकता है। यह विचार हमें जाति-पाति से ऊपर उठकर व्यक्ति के गुणों को महत्व देने की सीख देता है।
समाज में बदलाव के लिए संत रविदास जी के संदेश को अपनाने का आह्वान
वक्ताओं ने कहा कि आज के समाज में संत रविदास जी के विचारों को अपनाने की नितांत आवश्यकता है। उनके विचार केवल भक्ति तक सीमित नहीं थे, बल्कि वे सामाजिक न्याय और समानता के प्रबल समर्थक थे।
- उन्होंने हमेशा छुआछूत और जातिवाद का विरोध किया।
- वे मानते थे कि भगवान किसी विशेष जाति के लिए नहीं होते, बल्कि वे सबके लिए समान होते हैं।
- उन्होंने लोगों को स्वतंत्र सोचने और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी।
सैकड़ों लोगों की सहभागिता और उत्साह
इस जयंती समारोह में सैकड़ों लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में गांव और आसपास के इलाकों से आए कई गणमान्य व्यक्तियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उपस्थित लोगों में शामिल थे –
- गुरूशरण दास
- सुभाष दास
- सचिन दास
- रंजीत दास
- नरेश दास
- ओपेंद्र दास
- विकास दास
सांस्कृतिक कार्यक्रम और भंडारे का आयोजन
कार्यक्रम के दौरान संत रविदास जी के भजन गाए गए, जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया।
- गांव के बच्चों और युवाओं ने नाटक और गीत प्रस्तुत किए, जिनमें संत रविदास जी के विचारों को दर्शाया गया।
- सभा के अंत में सामूहिक भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सभी उपस्थित लोगों को प्रसाद और भोजन वितरित किया गया।
समारोह का समापन और संकल्प
अंत में सभी लोगों ने संत रविदास जी के दिखाए गए मार्ग पर चलने और समाज में समानता, भाईचारा और न्याय को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि हमें संत रविदास जी की शिक्षाओं को केवल सुनना नहीं, बल्कि उन्हें अपने जीवन में अपनाना चाहिए।
इस जयंती समारोह ने समाज में समानता, एकता और भाईचारे के संदेश को मजबूत किया और उपस्थित लोगों को संत रविदास जी के आदर्शों के प्रति समर्पित होने की प्रेरणा दी।

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