त्रिदिवसीय चित्रगुप्त भगवान प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव का भव्य समापन, हवन-पूजन के बाद श्रद्धालुओं के बीच हुआ प्रसाद वितरण
जमुई : जमुई नगर में भगवान चित्रगुप्त की त्रिदिवसीय प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव का शुक्रवार को विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भव्य समापन हो गया। तीन दिनों तक चले इस पावन आयोजन में श्रद्धा, आस्था और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। समापन के अवसर पर हवन-पूजन संपन्न कराया गया, जिसके उपरांत श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।
त्रिदिवसीय महोत्सव के पहले दिन शास्त्री कॉलोनी से भव्य कलश शोभा यात्रा निकाली गई थी। यह शोभा यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों—कृष्ण सिंह स्टेडियम, कचहरी चौक सहित—से गुजरते हुए हनुमान घाट और कल्याणपुर तक पहुंची। शोभा यात्रा में पारंपरिक परिधानों में सुसज्जित महिला-पुरुष, युवा एवं बच्चे हाथों में कलश लेकर चल रहे थे। ढोल-नगाड़ों, शंखनाद और “जय चित्रगुप्त भगवान” के जयघोष से पूरा नगर भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।
महोत्सव के दूसरे दिन मंदिर परिसर में विधिवत पूजन-अर्चन, धार्मिक अनुष्ठान एवं भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया, जिसमें चित्रांश समाज सहित अन्य श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या ने सहभागिता की। पूरे दिन भक्तों का तांता लगा रहा और वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा।
तीसरे एवं अंतिम दिन शुक्रवार को प्रातःकाल वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-पूजन संपन्न कराया गया। श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से आहुति देकर भगवान चित्रगुप्त से समाज, परिवार एवं राष्ट्र की सुख-समृद्धि की कामना की। हवन-पूजन के पश्चात आयोजन समिति की ओर से श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। श्रद्धालुओं ने पंक्तिबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया।
इस अवसर पर समाजसेवी संजीव कुमार सिन्हा ने कहा कि भगवान चित्रगुप्त की प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक परंपरा और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने सफल आयोजन के लिए सभी श्रद्धालुओं, चित्रांश समाज के परिवारों एवं सहयोगकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
त्रिदिवसीय प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान सुरक्षा, पेयजल एवं यातायात व्यवस्था को लेकर आयोजन समिति एवं स्वयंसेवकों की सक्रिय भूमिका सराहनीय रही। महोत्सव के समापन के साथ ही पूरे जमुई नगर में श्रद्धा, अनुशासन और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण व्याप्त रहा।

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