गिद्धौर के विराट महायज्ञ में गूंजी रामराज्य की गाथा
- श्रीराम के राज्याभिषेक के साथ नौ दिवसीय आयोजन का हुआ समापन
- समिति के कार्यकर्ताओं को किया गया सम्मानित
- रामकथा की टीम को दिया गया श्रीमद्भागवत गीता
गिद्धौर संवाददाता
गिद्धौर स्थित ऐतिहासिक पंचमंदिर परिसर के निकट 2 से 10 फरवरी तक सनातन संस्कृति सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित नौ दिवसीय विराट महायज्ञ, रामकथा एवं रामलीला का समापन मंगलवार की देर शाम भव्य और भक्तिमय वातावरण में संपन्न हो गया। अंतिम दिन श्रीराम के राज्याभिषेक और रामराज्य स्थापना का प्रसंग सुनते ही पूरा पंडाल जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। नौवें दिन आयोजित रामकथा में श्रीधाम वृंदावन से पधारे कथा प्रवक्ता पंडित कृष्णकांत जी महाराज ने भगवान श्रीराम के वनवास से लेकर अयोध्या वापसी और राज्याभिषेक तक की संपूर्ण गाथा का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा में बताया गया कि भरत जी चित्रकूट पहुंचकर श्रीराम से अयोध्या लौटने का आग्रह करते हैं, किंतु राम जी पिता के वचन को सर्वोपरि मानते हुए वनवास पूर्ण करने का निर्णय दोहराते हैं। तब भरत जी उनकी चरण पादुका लेकर अयोध्या लौट आते हैं और उन्हीं को सिंहासन पर स्थापित कर स्वयं सेवक भाव से राज्य का संचालन करते हैं। कथा के क्रम में शूर्पणखा प्रसंग का भी विस्तार से वर्णन हुआ। वनवास के दौरान शूर्पणखा द्वारा श्रीराम को विवाह प्रस्ताव देना, लक्ष्मण द्वारा उसकी नाक काटना और प्रतिशोधवश रावण को सीता हरण के लिए उकसाना, इन घटनाओं को सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। इसके पश्चात रावण द्वारा माता सीता का पुष्पक विमान से हरण, श्रीराम का वन-वन भटककर सीता की खोज करना और हनुमान जी से भेंट का प्रसंग अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया। हनुमान जी के लंका गमन, अशोक वाटिका विध्वंस, लंका दहन, तथा युद्ध प्रसंगों का सजीव चित्रण करते हुए पंडित कृष्णकांत जी महाराज ने बताया कि कैसे लक्ष्मण जी ने मेघनाद का वध किया और युद्ध के दौरान मूर्छित होने पर हनुमान जी संजीवनी बूटी लेकर आए। अंततः भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर धर्म की स्थापना की और अयोध्या लौटकर महर्षि वशिष्ठ द्वारा उनका विधिवत राज्याभिषेक हुआ, जिससे रामराज्य की स्थापना हुई। कथा के दौरान गिद्धौर की दो बालिकाओं ने भगवान श्रीराम और जनकनंदिनी सीता का तथा एक बालक ने हनुमान जी का रूप धारण कर पंडाल में रामदरबार की सजीव झांकी प्रस्तुत की। इस मनोहारी दृश्य ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। समापन दिवस पर पंडाल श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा। दूर-दराज के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और रामकथा का रसपान किया। आखिरी दिन कथावाचक पंडित कृष्णकांत जी महाराज ने श्रद्धालुओं को आशीर्वाद स्वरूप भेंट दिए, वहीं स्थानीय महिलाओं ने भी उन्हें विदाई के रूप में उपहार दिये। समापन पर सनातन संस्कृति सेवा समिति के सदस्यों को भी सम्मानित किया गया। वहीं रामकथा की पूरी टीम एवं अन्य गणमान्यजनों को समिति के सह सचिव सुशांत साईं सुंदरम द्वारा श्रीमद्भागवत गीता की प्रति भेंट की गई। आयोजन के दौरान प्रतिदिन भव्य भंडारे की व्यवस्था की गई, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम के सुव्यवस्थित संचालन में प्रशासन का भी सराहनीय सहयोग रहा। इस विराट आयोजन को सफल बनाने में सनातन संस्कृति सेवा समिति के अध्यक्ष सोनू कुमार, सचिव सुमन कुमार, सह सचिव सुशांत साईं सुंदरम, सह-कोषाध्यक्ष रॉकी कुमार, उपाध्यक्ष राजेश कुमार उर्फ पाजो जी सहित अन्य सदस्यों ने समर्पण भाव से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। आयोजन में राजनीतिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों की भी उपस्थिति रही। नौ दिवसीय विराट महायज्ञ, रामकथा एवं रामलीला के माध्यम से गिद्धौर का संपूर्ण वातावरण भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो उठा। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक चेतना को सुदृढ़ किया, बल्कि समाज में आपसी सद्भाव, सांस्कृतिक एकता और नैतिक मूल्यों का भी सशक्त संदेश दिया। इसी के साथ नौ दिवसीय यह भव्य धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धा और उल्लास के वातावरण में संपन्न हो गया।

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