मौरा बालू घाट: मानक के अनुरूप खनन पर बनी समिति, 13 दिन बाद किसानों का धरना समाप्त
जमुई : मौरा बालू घाट में कथित अवैध एवं मानक के विपरीत खनन के विरोध में 13 दिनों से चल रहा किसानों का अनिश्चितकालीन धरना प्रशासन के आश्वासन के बाद समाप्त हो गया। अनुमंडल पदाधिकारी के साथ घंटों चली वार्ता के उपरांत आठ सूत्री मांगों पर सहमति बनी, जिसके बाद किसानों ने आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की।
धरनार्थी किसानों के प्रतिनिधियों से विमर्श के बाद अनुमंडल पदाधिकारी ने आश्वस्त किया कि रात्रि में खनन पूरी तरह बंद रहेगा। साथ ही एक मीटर से अधिक गहराई तक बालू खनन नहीं किया जाएगा तथा प्रतिवर्ष निर्धारित 4,77,774 टन से अधिक बालू का उठाव नहीं होगा।
प्रशासन ने यह भी कहा कि घाट पर अब तक जमा बालू का मापी कर उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी। नदी के प्रवाह क्षेत्र में बनाए गए अस्थायी सड़क (रोड) को ध्वस्त किया जाएगा तथा पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए घाट के आसपास वृक्षारोपण कराया जाएगा।
इसके अतिरिक्त दीर्घकालीन निगरानी समिति में किसानों के पांच प्रतिनिधियों को शामिल करने पर सहमति बनी, जो समय-समय पर खनन कार्य की समीक्षा करेंगे। पब्लिक ऑपिनियन की उच्च स्तरीय जांच के संबंध में भी संबंधित विभाग को पत्र भेजने की बात कही गई।
धरना का नेतृत्व कर रहे भाजपा माले नेता बाबू साहब सिंह ने कहा कि प्रशासन द्वारा जिन बिंदुओं पर आश्वासन दिया गया है, यदि उन पर अमल नहीं हुआ तो किसान पुनः आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
मौके पर किसान नेता कुणाल सिंह, सच्चिदानंद मिश्र, गौरव सिंह राठौड़, अनिल रावत, अशोक सिंह, सचित रावत, रामप्रवेश रावत, गिरीश झा, सरयू यादव, काजू सिंह, सुभाष सिंह, अजय सिंह, टुनटुन सिंह सहित दर्जनों किसान उपस्थित थे।


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