मानवता की मिसाल : रतन टाटा जयंती पर चौकिया के जंगलों में समाजसेवी डॉ. नीरज साह ने हजारों गरीब व आदिवासी परिवारों के बीच किया कंबल वितरण - City Channel

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Tuesday, December 30, 2025

मानवता की मिसाल : रतन टाटा जयंती पर चौकिया के जंगलों में समाजसेवी डॉ. नीरज साह ने हजारों गरीब व आदिवासी परिवारों के बीच किया कंबल वितरण

मानवता की मिसाल : रतन टाटा जयंती पर चौकिया के जंगलों में समाजसेवी डॉ. नीरज साह ने हजारों गरीब व आदिवासी परिवारों के बीच किया कंबल वितरण

लक्ष्मीपुर, जमुई ; भारत रत्न स्वर्गीय रतन टाटा की जयंती के अवसर पर जमुई जिले के लक्ष्मीपुर प्रखंड अंतर्गत चौकिया गांव के सुदूर जंगली इलाके में मानवता और समाज सेवा की एक अनुकरणीय मिसाल देखने को मिली। जमुई के प्रसिद्ध हड्डी रोग विशेषज्ञ एवं समाजसेवी डॉ. नीरज साह द्वारा भीषण ठंड को देखते हुए हजारों की संख्या में गरीब, असहाय और आदिवासी परिवारों के बीच कंबल का वितरण किया गया।

यह आयोजन न सिर्फ सेवा का प्रतीक बना, बल्कि रतन टाटा

 जी के विचारों और मूल्यों को जमीन पर उतारने का सशक्त उदाहरण भी रहा। चौकिया जंगल क्षेत्र से जुड़े करीब 10 आदिवासी गांवों के लोग इस सेवा कार्यक्रम में शामिल हुए। दुर्गम और ठंड से प्रभावित इस क्षेत्र में कंबल पाकर लोगों के चेहरे पर राहत और खुशी साफ झलक रही थी।


डॉ. नीरज साह पिछले 20 वर्षों से निरंतर समाज सेवा के कार्यों में लगे हुए हैं। हर वर्ष ठंड के मौसम में वे दूर-दराज और उपेक्षित इलाकों में पहुंचकर जरूरतमंदों के बीच कंबल वितरण करते हैं। इतना ही नहीं, ग्रामीणों की बुनियादी जरूरतों को समझते हुए उन्होंने यहां पेयजल की समस्या को देखते हुए चापाकल (बोरिंग) की भी व्यवस्था कराई, जिससे ग्रामीणों को स्वच्छ पानी उपलब्ध हो सका।

समाजसेवी डॉ. नीरज साह का कथन

डॉ. नीरज साह ने इस अवसर पर कहा—“देश रत्न रतन टाटा जी का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा है। उनका पूरा जीवन समाज और देश के लिए समर्पित रहा। मुझे लगता है कि अगर सच्ची पूजा कहीं होती है, तो वह गरीबों की सेवा में होती है। जब इंसान जरूरतमंद के दुख को समझता है, तभी उसे ईश्वर का सच्चा रूप दिखाई देता है।”

उन्होंने आगे कहा—

“मैं पिछले 20 वर्षों से समाज सेवा कर रहा हूं और आगे भी करता रहूंगा। इस ठंड में जंगलों और आदिवासी इलाकों में रहने वाले लोग सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। ऐसे में अगर हम थोड़ी-सी मदद कर सकें, तो यही सबसे बड़ी मानवता है।”

शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए डॉ. साह ने कहा—

“गरीबी से बाहर निकलने का सबसे मजबूत रास्ता शिक्षा है। मैं हमेशा ग्रामीण माताओं-बहनों से कहता हूं कि अपने बच्चों को जरूर पढ़ाएं, ताकि वे आगे चलकर डॉक्टर, इंजीनियर और समाज का बेहतर नागरिक बन सकें।”

कंबल वितरण के दौरान लाभार्थियों ने डॉ. नीरज साह को दुआएं दीं और कहा कि ठंड के इस कठिन समय में उन्हें बड़ी राहत मिली है। ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले किसी ने इस तरह जंगल में आकर न सिर्फ कंबल बांटे, बल्कि पानी की सुविधा भी उपलब्ध कराई।

कार्यक्रम के अंत में स्थानीय लोगों ने डॉ. नीरज साह के प्रति आभार जताया और उनके इस मानवीय प्रयास की सराहना की। रतन टाटा जयंती के अवसर पर किया गया यह सेवा कार्य समाज के लिए एक सशक्त संदेश है कि यदि सोच रतन टाटा जैसी हो, तो कोई भी इलाका और कोई भी गरीब उपेक्षित नहीं रह सकता।

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