गिरिडीह: सिख धर्म के संस्थापक श्री गुरु नानक देव जी का 556वां प्रकाश पर्व गिरिडीह में अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और भक्ति भाव से मनाया जा रहा है। इस पावन अवसर पर गुरुवार की सुबह शहर में प्रभात फेरी निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में सिख संगतों, पुरुषों, महिलाओं और बच्चों ने भाग लिया।
30 अक्टूबर से प्रारंभ हुए धार्मिक कार्यक्रमों की यह श्रृंखला 5 नवंबर तक चलेगी। प्रभात फेरी पंजाबी मोहल्ला स्थित गुरुद्वारा साहिब से आरंभ होकर मकतपुर चौक, जिला परिषद चौक और टावर चौक से गुजरते हुए बक्सीडीह में एक सिख परिवार के आवास पर जाकर संपन्न हुई। पूरे मार्ग में संगतों द्वारा “धन गुरु नानक प्यारे” और “कौन जाने गुण सतगुरु तेरे” जैसे गुरबाणी कीर्तन की मधुर ध्वनियाँ गूंजती रहीं, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
प्रभात फेरी के दौरान नगर के विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर संगतों का स्वागत किया। महिला संगतों द्वारा मधुर शब्द-कीर्तन और अरदास का आयोजन हुआ, जिसने लोगों के हृदयों में शांति और भक्ति का संचार किया।
आयोजकों ने बताया कि 4 नवंबर को एक भव्य नगर कीर्तन (शोभा यात्रा) निकाली जाएगी, जिसमें गुरु ग्रंथ साहिब जी की अगुवाई में पंज प्यारे, निशान साहिब और विभिन्न जत्थे नगर का भ्रमण करेंगे। इस शोभा यात्रा में संगतों द्वारा सेवा, भक्ति और अनुशासन का अद्भुत प्रदर्शन देखने को मिलेगा। झांकियां, कीर्तन और श्रद्धालुओं की सहभागिता से यह नगर कीर्तन और भी आकर्षक बनेगा।
मुख्य समारोह 5 नवंबर को आयोजित किया जाएगा, जब सिख समुदाय गुरु नानक जयंती के रूप में प्रकाश पर्व मनाएगा। इस दिन विशेष कीर्तन दरबार, शबद-संकीर्तन, अरदास और गुरु का लंगर आयोजित होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे।
गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के सदस्यों ने बताया कि गुरु नानक देव जी के उपदेश आज भी मानवता के लिए मार्गदर्शक हैं। उन्होंने कहा कि गुरु जी के बताई राह — “नाम जपो, किरत करो और वंड छको” — पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।
प्रकाश पर्व के अवसर पर पूरा गिरिडीह शहर भक्ति और एकता के संदेश से सराबोर है। गुरु नानक देव जी के उपदेशों — प्रेम, सेवा, समानता और मानवता — को आत्मसात करने का आह्वान करते हुए संगतों ने उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।

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