महेश्वरी में श्रीरामचरितमानस नवाह पारायण महायज्ञ का भव्य आयोजन
🔹भाजपा किसान मोर्चा के क्षेत्रीय प्रभारी रणजीत सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया उद्घाटन।
सिटी संवाददाता: पंकज बरनवाल
सोनो/जमुई, 20 फरवरी 2025 : सोनो प्रखंड के महेश्वरी गाँव स्थित बाबा मनमहेश नाथ शिव मंदिर प्रांगण में "श्री श्री 108 श्रीरामचरितमानस नवाह पारायण महायज्ञ" के तृतीय दिवस कार्यक्रम का आयोजन भव्य तरीके से किया गया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि भाजपा किसान मोर्चा के क्षेत्रीय प्रभारी रणजीत सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर महायज्ञ का विधिवत उद्घाटन किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि यज्ञ से भगवान श्रीराम की उत्पत्ति हुई थी और यह न केवल वातावरण को स्वच्छ एवं आनंदमय बनाता है, बल्कि सनातन संस्कृति की रक्षा और सामाजिक सद्भाव भी स्थापित करता है।
भव्य आयोजन और आध्यात्मिक वातावरण
यज्ञ स्थल पर पहुंचने से दैहिक, दैविक और भौतिक तीनों तापों से मुक्ति मिलती है।
रणजीत सिंह ने इस दिव्य और भव्य यज्ञ स्थल का अवलोकन करते हुए सर्वकल्याण की कामना की।
इस आयोजन में भाजपा जिला मंत्री मनोज कुमार सिंह बतौर वरिष्ठ अतिथि उपस्थित रहे।
मुख्य यजमान रोहित कुमार सिंह ने मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।
यज्ञाचार्य महेश पाण्डेय के मार्गदर्शन में महायज्ञ का संचालन हो रहा है।
इस भव्य आयोजन में सैकड़ों श्रद्धालु, युवा, साधु-संत और धर्मप्रेमी नर-नारी उपस्थित रहे।
भक्ति संगीत और आध्यात्मिक रसास्वादन
इस अवसर पर वृंदावन धाम, मथुरा-वृंदावन से आए रसिक कलाकारों ने भक्ति संगीतमय प्रस्तुतियों से उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
भजन-कीर्तन और संकीर्तन से संपूर्ण वातावरण भक्तिमय, रंगमय एवं सुगंधमय हो गया।
सम्मानित अतिथि और आयोजन समिति
महायज्ञ में उपस्थित प्रमुख श्रद्धालुओं में—
✅ प्रधान यजमान: रोहित सिंह
✅ यज्ञाचार्य: महेश पाण्डेय
✅ अन्य श्रद्धेय: जगतमोहन पाण्डेय, धर्मेंद्र सिंह, राजेश सिंह, विपिन सिंह आदि शामिल थे।
कार्यक्रम का सफल संचालन मुकेश कुमार पाण्डेय ने किया।
श्रद्धालुओं में उत्साह, भक्ति और धार्मिक आस्था का माहौल
इस आयोजन से न केवल धार्मिक चेतना को बढ़ावा मिला, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक एकता की मिसाल भी कायम हुई।
यज्ञ स्थल पर श्रद्धालु आरती, भजन-कीर्तन और कथा-वाचन का आनंद ले रहे हैं।
यह आयोजन सनातन संस्कृति के गौरवशाली परंपराओं को सहेजने और पीढ़ियों तक पहुँचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।


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