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Wednesday, May 29, 2024

वट सावित्री पूजा से म पति की दीर्घायु, सुख और धन धान्य की होती है प्राप्ति

वट सावित्री पूजा से पति की दीर्घायु, सुख और धन धान्य की होती है प्राप्ति       

🔹पूजन की तैयारी मे अभी से जुट गई है महिलाए।  उपवास व पूजन का बेहद है महत्व। पूजन की निभाई जाती रही है हिंदू धर्म की मान्यताओ की परंपरा।            

अलीगंज/जमुई : जेठ कृष्ण पक्ष आमावसया को वट सावित्री पूजा मनायी जाती है। जो इस वर्ष आगामी 6 जून को है। वट वृक्ष की पूजा कर सुहागिन अपने अखंड सौभाग्य की कामना करती है। एक दिवसीय उपवास रखा जाता है। वट साविञी पूजन की तैयारी मे सुहागिन महिलाओ अभी से ही जुट गई है। 

हिन्दु धर्म अनुसार वट सावित्री व्रत का सुहागिन महिलाओ के लिए और अधिक महत्व होता है।इस दिन महिलाए अपने सूखद वैवाहिक जीवन के लिए वट वृक्ष की पूजन करती है। माना जाता है कि इस दिन साविञी ने अपने पति सत्यभामा के प्राण यमराज से भी वापस ले लिये थे। तभी से दिन को वट सावित्री व्रत के रूप मे पति के लंबी आयु के लिए मनाया जाता है। इस व्रत मे वरगद पेड का खास महत्व होता है।                  

वट सावित्री व्रत का है विशेष महत्व :

 ज्योतिषाचार्य पंडित पंकज पाण्डेय ने बताया कि वट वृक्ष के जडो मे ब्रह्मा जी ,तने मे भगवान विष्णु और पतो मे भगवान शिव का वास होता है। माँ साविञी भी वट वृक्ष मे निवास करती है। वट वृक्ष की पूजा न सिर्फ अक्षय स्वभाव की दीर्घायु भी देता है। इस प्रकार से सुहागिनो के लिए वट सावित्री पूजा का विशेष महत्व होता है।

वट सावित्री व्रत का शुभ मुहूर्त : 

विद्वान ब्राह्माण बताते है कि वट साविञी व्रत के पूजन मे शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना जरूरी होता है। इस वर्ष जेठ आमावसया तिथि 5 जून की रात 7:54 से शुरू होकर 6 जून की शाम 06,07 बजे तक रहेगी। इसदिन पूजा के लिए सुबह 10 बजकर 36 मिनट से दोपहर 02,04 बजे तक शुभ मुहूर्त है।

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