झरना मालिक बनीं थैलेसीमिया श्रेणी की इंटरनेशनल पर्पल फेस्ट 2025 की ब्रांड एंबेसड - City Channel

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Wednesday, August 13, 2025

झरना मालिक बनीं थैलेसीमिया श्रेणी की इंटरनेशनल पर्पल फेस्ट 2025 की ब्रांड एंबेसड

झरना मालिक बनीं थैलेसीमिया श्रेणी की इंटरनेशनल पर्पल फेस्ट 2025 की ब्रांड एंबेसडर


🔹85% दिव्यांगता के बावजूद थैलेसीमिया मरीजों की बनीं सशक्त आवाज़।

सिटी ब्यूरो रिपोर्ट : राजीव शर्मा

दिल्ली : जन्म से थैलेसीमिया मेजर जैसी गंभीर बीमारी और 85% स्थायी दिव्यांगता के बावजूद हिम्मत, सेवा और संघर्ष का प्रतीक बनीं सामाजिक कार्यकर्ता झरना मालिक को इंटरनेशनल पर्पल फेस्ट 2025 के लिए थैलेसीमिया श्रेणी की ब्रांड एंबेसडर चुना गया है। यह सम्मान भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, गोवा सरकार के दिव्यांगजन आयुक्त कार्यालय और संयुक्त राष्ट्र भारत के सहयोग से आयोजित अंतरराष्ट्रीय महोत्सव में उन्हें प्रदान किया जाएगा।

सर्वेशं मंगलम् फाउंडेशन की निदेशक और थैलेसीमिया डिसएबल्ड एंड वॉरियर्स संस्था की संस्थापक झरना मालिक वर्षों से थैलेसीमिया और दिव्यांगजन सशक्तिकरण के क्षेत्र में सक्रिय हैं। हाल ही में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर वंचित क्षेत्रों में रहने वाले वयस्क थैलेसीमिया रोगियों की चुनौतियों को बेबाकी से रखा, जिससे उन्हें एक सशक्त प्रवक्ता के रूप में पहचान मिली।

जन्म से ही इस गंभीर बीमारी से जूझते हुए भी झरना हर महीने रक्त चढ़ाने के बावजूद अपनी प्रगति में रुकावट नहीं आने देतीं। कोविड-19 महामारी के दौरान अकेले दिल्ली में रहकर इलाज करवाते हुए उन्होंने देशभर के थैलेसीमिया मरीजों के लिए रक्त, दवाइयां, आर्थिक मदद और मानसिक सहयोग की व्यवस्था जारी रखी। ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में जागरूकता अभियान, रक्तदान शिविर और रोगी सहायता कार्यक्रम उनके काम का अहम हिस्सा हैं।

वर्ष 2016 में उन्होंने विकलांगता अधिकार अधिनियम (RPwD Act 2016) में थैलेसीमिया को शामिल करवाने के राष्ट्रीय अभियान में ओडिशा का प्रतिनिधित्व किया, जिसके बाद इस बीमारी को “विशिष्ट विकलांगता” का दर्जा मिला और मरीजों को शिक्षा, रोजगार एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में कानूनी अधिकार प्राप्त हुए।

क्लिंग भारती फाउंडेशन ने उनके अथक प्रयासों को देखते हुए उन्हें ब्रांड एंबेसडर के लिए नामांकित किया, जिसे पर्पल फेस्ट की राष्ट्रीय चयन टीम ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी। झरना मालिक का कहना है कि यह सम्मान उनकी व्यक्तिगत यात्रा के साथ-साथ देशभर के उन थैलेसीमिया योद्धाओं की आवाज़ भी है, जो संघर्ष के बावजूद आगे बढ़ रहे हैं। उनका सपना एक थैलेसीमिया-मुक्त भारत का निर्माण है, जहाँ मरीज आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जी सकें।


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